Skip to main content

अलग पूर्वांचल राज्य की मांग कर रहे संगठन, पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा की एक बैठक तहसील परिसर रावटसगंज सोनभद्र में हुई -- दैनिक दर्पण (पूर्वांचल)


                                                  
    इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव पवन कुमार सिंह एडवोकेट ने कहा कि जिसमें आगामी 19 सितंबर 2022 को दीनदयाल उपाध्याय नगर मुगलसराय चंदौली में जागो पूर्वांचल नामक पुस्तक का विमोचन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया है इस पुस्तक को कवि,समाजसेवी पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा के संरक्षक श्री चंद्र भूषण मिश्र कौशिक जी द्वारा लिखित है जो पिछले कई वर्षों से पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा द्वारा पृथक पूर्वांचल राज्य के आंदोलन से जुड़े हैं उन्होंने जागो पूर्वांचल पुस्तक के माध्यम से अलग पूर्वांचल राज्य की महत्ता व उपयोगिता के बारे में इस पुस्तक में विस्तार से बताया है उन्होंने अलग पूर्वांचल राज्य पर लोगों की रायशुमारी भी इसमें डाली है यह पुस्तक उन सभी लोगों के लिए दिग्दर्शिका साबित होगी जिसके मन में बड़े व छोटे राज्य के विकास की अवधारणा को लेकर उथल-पुथल मचता रहता है                                       
 प्रदेश अध्यक्ष विमलेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि  जागो पूर्वांचल  पुस्तक को पढ़ना चाहिए आखिर क्यों ज्यादा क्या कंहुँ  बस इतना कहूँगा सनद रहे हम पूर्वांचली हैं और पूर्वांचली श्रमशील होता है  एक़ दिन वो जरूर आएगा जब अपनी बात कहने का हम सब में जनून आएगा यह गिलहरी प्रयास भी हम सब को पसंद आयेगा । संचालन शिव प्रकाश चौबे ने किया !                                
 इस अवसर पर वीरेंद्र कुमार सिंह एडवोकेट, संजीव कुमार उर्फ  काकू सिंह, नवीन कुमार पांडे, संतोष चतुर्वेदी, पवन कुमार द्विवेदी, दिनेश स्वरूप, दीप नारायण पटेल आदि लोग उपस्थित थे!                              
         प्रेषक काकू सिंह प्रदेश प्रवक्ता        
   पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा

Comments

Followers

Popular posts from this blog

इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स डे पर आर एस बनारस लॉ कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

सुन्दरपुर,वाराणसी ।  10 दिसंबर को विश्वभर में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स डे मनाया जाता है। तो वहीं आर एस बनारस लॉ कॉलेज सुंदरपुर में ह्यूमन राइट्स डिबेट में छात्रों ने बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया। कॉलेज के HOD विवेक सिंह ने विशेष रूप से कॉलेज स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराया, जिसमें छात्रों को मानवाधिकारों और उनके संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने पर जोर दिया गया। इसी दिन को 1948 में संयुक्त राष्ट्र ने Universal Declaration of Human Rights (UDHR) को अपनाया था। मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिन 1950 से हर साल आयोजित किया जाता है तो वहीं लॉ कॉलेज के फैकल्टी आशीष तिवारी ने बताया कि मानवाधिकार केवल आदर्श नहीं, बल्कि आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़े मूलभूत अधिकार हैं। समानता, सम्मान और स्वतंत्रता हर व्यक्ति के जन्मसिद्ध अधिकार माने जाते हैं और यह मिलना हर व्यक्ति का अधिकार है। तो वहीं फैकल्टी डॉ गौरव सिंह ने बताया कि मानवाधिकार दिवस न सिर्फ जागरूकता का अवसर है, बल्कि अन्याय, भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ समाज को ए...

आधुनिक आहार स्वास्थ्य के साथ एक खिलवाड़

आज भारत में बदलते समय के साथ हमारा आहार भी बदल रहा है। बाज़ार में कई प्रकार के व्यंजन एवं पेय पदार्थ हमें अपनी ओर आकर्षित करते हैं। चाहे बच्चे हो, युवा हो या वयस्क सब लोग भिन्न भिन्न प्रकार के व्यंजन का लुत्फ़ उठा रहे है पर सिर्फ़, जीभ के चलते हम अपने शरीर को अंदर से कितना खोखला कर रहे है। यह एक चिंतनीय विषय है। अगर वर्तमान समय में देखा जाये तो हमारे आस पास में अब पहले के तुलना में कई अधिक फ़ास्ट फ़ूड विक्रेता, फ़ूड स्टाल और रेस्तराँ खुल चुके है जहां हमें इटालियन से चाइनीज़ और मेक्सिकन से लेकर यूरोपियन ख़ान पान बहुत आराम से उपलब्ध हो जाता है और इन जगहों पर भीड़ हमे यह दर्शाता है की वाक़ई में अब हमारी ख़रीदने की क्षमता बहुत बढ़ चुकी हैं। बड़ी बड़ी पाश्चात्य कंपनियों का छोटे क़स्बो तक आउटलेट खुलना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। व्यापार के क्षेत्र में यह एक प्रशंसनीय पहल है पर स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह चिंतनीय है। आज आमजनों को कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स, फैट की जानकारी, या बिलकुल नहीं है या बहुत कम है, पर हमारे शरीर को इसकी जानकारी भरपूर है और अपने पाचनतंत्र के लिए वो इनकी भूमिका भी...

कटिया मार चोरों की नई क्रांति – बिजली विभाग हुआ हलकान!

क्यो न लिखूं में सच: अरविंद उपाध्याय की कलम से कछवारोड,वाराणसी। बिजली विभाग समय समय पर नई योजना निकालता रहता है जिससे हर घर को 24 घंटे बिजली मिल सके,  लेकिन कटिया मार यूनियन ने इसे अपना अपमान समझ लिया और कहा “ हमारी परंपरा है कटिया मारना, मीटर देख-देख कर बिल भरना हमारी संस्कृति में नहीं!” गाँव में अब न केवल बिजली का तार झूल रहा है, बल्कि कटिया भी हवा में झूमते हुए तिरंगा जैसा लहरा रहा है। बिजली विभाग के अधिकारी अक्सर छापेमारी करते है, पर कटिया मार चोरों का कहना है – “अरे साहब, आप छापा मारो, हम फिर से कटिया मारेंगे। यह हमारा स्टार्टअप है, हम इसे बंद नहीं कर सकते।” गाँव के चौराहे पर चर्चा है कि “बिजली चोरी अब कला बन चुकी है।” कई जगह तो बच्चों को बचपन से सिखाया जा रहा है कि सही तरीके से कटिया कैसे फेंकी जाए – जैसे क्रिकेट में गेंद फेंकना। अधिकारियों का कहना है कि मीटर से ज्यादा शिकायत अब कटिया कनेक्शन की आती है। बिजली विभाग के एक लाइनमैन ने तो यह भी कह डाला की हमारे पास जितनी शिकायतें कटिया की आती हैं, उतनी तो रिश्तेदारों की शादी में निमंत्रण नहीं आते!”