मिर्ज़ामुराद। क्षेत्र के करधना गांव में बीते दिन दो समुदाय में जम कर लाठी डंडे चले। जिसमें कई लोग घायल हो गए । मामला ताजियों के ले जाते वक्त पेड़ के डाल काटने को लेकर गरमाया था। करधना बाजार स्थित खदेरू शाव के दुकान के सामने पेड़ के डाल काटनो को लेकर झड़प हुई जिसमे खदेरू सहित उनके परिवार वाले व अन्य लोग घायल हो गए थे। जानकारी अनुसार बवाल मे लाठी डंडे, ईट पत्थर,के साथ साथ शस्त्र प्रदर्शन व शस्त्र प्रहार भी एक विशेष समुदाय कि तरफ से हुआ। जिसके वजह से कई घायल हो गए। सूचना पर पहुचे अन्य पास के बस्ती के लोगो ने जब विरोध कर लालकरना आरम्भ किए तब ताजिया छोड़ लोग फरार हो गए। हालांकि एसपी ग्रामीण ने शस्त्र के उपयोग से इंकार कर दिए। आईजी के सतनारायण सहित एसपी ग्रामीण , एडिशनल एसपी, एसडीएम राजातालाब, सीओ बड़ागांव सहित अन्य अधिकारी भारी मात्रा में पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच कर सूझ बूझ के साथ मामले को शांत कराया। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी ग्रामीण ने प्रभारी निरीक्षक मिर्जामुराद हरिनाथ भारती को हटाकर राजीव कुमार सिंह को प्रभारी निरिक्षक मिर्जामुराद के रूप में नियुक्त किया। अगले दिन बुधवार को बवाल स्थल पर तनावपूर्ण माहौल बना रहा। एडिशनल एसपी, सीओ बड़ागांव, व अन्य अधिकारियो के साथ भारी मात्रा में पुलिस बल तैनाती रही। पुलिस ने आला अधिकारियों के साथ फ्लैग मार्च कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। लोग अपने घरों में नजर आए। बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। लेकिन कुछ दुकानें खुली भी दिखी। कुछ व्यापारियों का मानना था कि कल की घटना से क्षेत्रवासी सहम गए हैं और वे बाजार में नहीं आ रहे हैं। जिसकी वजह से बाजार काफी प्रभावित रहा। इधर देर रात्रि मे सच्चालाल जयसवाल पुत्र जमुना प्रसाद निवासी करधना के तहरीर पर पुलिस ने मोहम्मद करीमुद्दीन के साथ 18 अन्य व लगभग 200 अज्ञात लोगो के खिलाफ 147, 148, 149, 323,504, 506, 452, 336,153ए,153 बी, 307 395, 427 आईपीसी 7 सीएलए के तहत मुकदमा दर्ज करके जांच में जुटी हुई है।
सुन्दरपुर,वाराणसी । 10 दिसंबर को विश्वभर में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स डे मनाया जाता है। तो वहीं आर एस बनारस लॉ कॉलेज सुंदरपुर में ह्यूमन राइट्स डिबेट में छात्रों ने बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया। कॉलेज के HOD विवेक सिंह ने विशेष रूप से कॉलेज स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराया, जिसमें छात्रों को मानवाधिकारों और उनके संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने पर जोर दिया गया। इसी दिन को 1948 में संयुक्त राष्ट्र ने Universal Declaration of Human Rights (UDHR) को अपनाया था। मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिन 1950 से हर साल आयोजित किया जाता है तो वहीं लॉ कॉलेज के फैकल्टी आशीष तिवारी ने बताया कि मानवाधिकार केवल आदर्श नहीं, बल्कि आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़े मूलभूत अधिकार हैं। समानता, सम्मान और स्वतंत्रता हर व्यक्ति के जन्मसिद्ध अधिकार माने जाते हैं और यह मिलना हर व्यक्ति का अधिकार है। तो वहीं फैकल्टी डॉ गौरव सिंह ने बताया कि मानवाधिकार दिवस न सिर्फ जागरूकता का अवसर है, बल्कि अन्याय, भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ समाज को ए...
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