Skip to main content

सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में चला स्वच्छता अभियान, कुलपति ने भी परिसर में लगाया झाड़ू



सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में चला स्वच्छता अभियान, कुलपति ने भी परिसर में लगाया झाड़ू

वाराणसी। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में गत रविवार को दो दिनी स्वच्छता अभियान चाला गया। इसी क्रम में कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय परिसर में झाड़ू लगाकर सफाई अभियान को गति दी। इस दौरान उन्होंने नवीन छात्रावास, श्रमण विद्या संकाय सहित सम्पूर्ण परिसर में सफाई कार्य किया।


कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, जिस घर में हर रोज सुबह साफ-सफाई होती है, वहां लक्ष्मी अपना घरौंदा बनाकर रहती हैं। स्वच्छ माहौल में सकारात्मकता का वास होता है। ऐसे घर में कभी किसी बात की कमी नहीं रहती। वास्तु के अनुसार घर को सजाना-संवारना, साफ-सुथरा रखना एक जरूरत है। जो वहां रहने वालों के जीवन की बाधाएं दूर कर खुशियां और सफलता दिलाने में सहायक होती है। 


उन्होंने बताया कि घर का मुख्य द्वार वास्तु दोष से मुक्त होना आवश्यक है। यदि इसमें कोई दोष हो, तो इसे तुरंत वास्तु उपायों के द्वारा ठीक कर लेना चाहिए। यह परिसर माँ सरस्वती का मन्दिर है यहाँ तो स्वच्छ रखना हमारा धर्म और कर्तव्य है।


कुलपति प्रो त्रिपाठी ने बताया कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के लिये है यहाँ के सारे तन्त्र विद्या और विद्याग्राही के हर तरह से सेवक हैं इसी भावना से कल से चल रहे विशेष स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत केन्द्रीय कार्यालय, प्रकाशन संस्थान, पुस्तकालय, छात्रावास, सभी शैक्षीकविभाग, संकाय सहित परिसर के अन्य स्थानों की जनजागरुकता के साथ सभी के स्वेच्छा सहयोग से किया गया। 

हमारे संस्था के अध्यापक ,कर्मचारी तत्पर हो मनोभाव से इस अभियान मे सहभाग कर रहे हैं।परिसर मे निष्प्रयोज्य सामग्री को इकठ्ठा कर नियमानुसार उसका समाधान भी किया जा रहा है।

कहा कि कार्यालयों मे रखे सभीअभिलेख के रखरखाव को दुरुस्त कर जिम्मेदार लोगों को ध्यान देने की जरुरत है। समय समय पर ऐसे अभियान से हर कठिन कार्य को आसानी पूर्वक सभी के सहयोग से किया जाता रहेगा।

कुलपति के साथ यहां के कुलसचिव डॉ ओमप्रकाश,प्रो हरिशंकर पान्डेय,वेद वेदांग संकायाध्यक्ष प्रो महेंद्र पान्डेय,चीफ वॉर्डन प्रो शंभू शुक्ल,चीफ प्रॉक्टर प्रो शैलेश मिश्र,डॉ रविशंकर पान्डेय,डॉ सत्येंद्र कुमार,डॉ विजेंद्र आर्य,सहायक अभियंता ई राम विजय सिंह,डॉ विमल त्रिपाठी एवं अजय पान्डेय और विद्यार्थियों ने भी भरपूर सहयोग कर स्वच्छता अभियान को व्यापक गति प्रदान किया।


श्रोत -लाइव वीएनएस न्यूज़

Comments

Followers

Popular posts from this blog

इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स डे पर आर एस बनारस लॉ कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

सुन्दरपुर,वाराणसी ।  10 दिसंबर को विश्वभर में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स डे मनाया जाता है। तो वहीं आर एस बनारस लॉ कॉलेज सुंदरपुर में ह्यूमन राइट्स डिबेट में छात्रों ने बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया। कॉलेज के HOD विवेक सिंह ने विशेष रूप से कॉलेज स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराया, जिसमें छात्रों को मानवाधिकारों और उनके संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने पर जोर दिया गया। इसी दिन को 1948 में संयुक्त राष्ट्र ने Universal Declaration of Human Rights (UDHR) को अपनाया था। मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिन 1950 से हर साल आयोजित किया जाता है तो वहीं लॉ कॉलेज के फैकल्टी आशीष तिवारी ने बताया कि मानवाधिकार केवल आदर्श नहीं, बल्कि आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़े मूलभूत अधिकार हैं। समानता, सम्मान और स्वतंत्रता हर व्यक्ति के जन्मसिद्ध अधिकार माने जाते हैं और यह मिलना हर व्यक्ति का अधिकार है। तो वहीं फैकल्टी डॉ गौरव सिंह ने बताया कि मानवाधिकार दिवस न सिर्फ जागरूकता का अवसर है, बल्कि अन्याय, भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ समाज को ए...

आधुनिक आहार स्वास्थ्य के साथ एक खिलवाड़

आज भारत में बदलते समय के साथ हमारा आहार भी बदल रहा है। बाज़ार में कई प्रकार के व्यंजन एवं पेय पदार्थ हमें अपनी ओर आकर्षित करते हैं। चाहे बच्चे हो, युवा हो या वयस्क सब लोग भिन्न भिन्न प्रकार के व्यंजन का लुत्फ़ उठा रहे है पर सिर्फ़, जीभ के चलते हम अपने शरीर को अंदर से कितना खोखला कर रहे है। यह एक चिंतनीय विषय है। अगर वर्तमान समय में देखा जाये तो हमारे आस पास में अब पहले के तुलना में कई अधिक फ़ास्ट फ़ूड विक्रेता, फ़ूड स्टाल और रेस्तराँ खुल चुके है जहां हमें इटालियन से चाइनीज़ और मेक्सिकन से लेकर यूरोपियन ख़ान पान बहुत आराम से उपलब्ध हो जाता है और इन जगहों पर भीड़ हमे यह दर्शाता है की वाक़ई में अब हमारी ख़रीदने की क्षमता बहुत बढ़ चुकी हैं। बड़ी बड़ी पाश्चात्य कंपनियों का छोटे क़स्बो तक आउटलेट खुलना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। व्यापार के क्षेत्र में यह एक प्रशंसनीय पहल है पर स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह चिंतनीय है। आज आमजनों को कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स, फैट की जानकारी, या बिलकुल नहीं है या बहुत कम है, पर हमारे शरीर को इसकी जानकारी भरपूर है और अपने पाचनतंत्र के लिए वो इनकी भूमिका भी...

कटिया मार चोरों की नई क्रांति – बिजली विभाग हुआ हलकान!

क्यो न लिखूं में सच: अरविंद उपाध्याय की कलम से कछवारोड,वाराणसी। बिजली विभाग समय समय पर नई योजना निकालता रहता है जिससे हर घर को 24 घंटे बिजली मिल सके,  लेकिन कटिया मार यूनियन ने इसे अपना अपमान समझ लिया और कहा “ हमारी परंपरा है कटिया मारना, मीटर देख-देख कर बिल भरना हमारी संस्कृति में नहीं!” गाँव में अब न केवल बिजली का तार झूल रहा है, बल्कि कटिया भी हवा में झूमते हुए तिरंगा जैसा लहरा रहा है। बिजली विभाग के अधिकारी अक्सर छापेमारी करते है, पर कटिया मार चोरों का कहना है – “अरे साहब, आप छापा मारो, हम फिर से कटिया मारेंगे। यह हमारा स्टार्टअप है, हम इसे बंद नहीं कर सकते।” गाँव के चौराहे पर चर्चा है कि “बिजली चोरी अब कला बन चुकी है।” कई जगह तो बच्चों को बचपन से सिखाया जा रहा है कि सही तरीके से कटिया कैसे फेंकी जाए – जैसे क्रिकेट में गेंद फेंकना। अधिकारियों का कहना है कि मीटर से ज्यादा शिकायत अब कटिया कनेक्शन की आती है। बिजली विभाग के एक लाइनमैन ने तो यह भी कह डाला की हमारे पास जितनी शिकायतें कटिया की आती हैं, उतनी तो रिश्तेदारों की शादी में निमंत्रण नहीं आते!”